रायपूर कि हालहि कि घटना है। वहा पे मेरा चचेरा भाई रोहन का घर है। हाल हि मे रोहन को एक कंपनी मे अच्छी नौकरी मिली थी। घर मेँ सबकुछ अच्छी तरह सेट था तो घर मे रोहन के शादि कि बात चल रहि थी। वैसे भी अब रोहन कि शादी की उम्र भी हो चुकि थी और शादी करने मे रोहन को कोई एतराज नहि था। रोहन के लिए एक दो रिश्ते भी आए थे तो घरवालोँने रोहन को अपने एक रीश्तेदार के यहा लडकि देखने के लिए भेज दिया। अब मेरा बेचारा भाई रोहन अकेले जाने को डर गया। लेकिन घरवालो को उस दिन एक निजी रिश्तेदार के यहा एक जरुरी काम से जाना था तो यह तय हुआ कि रोहन अपने करीबी दोस्त शाम के साथ लडकि देखने जाए।
तो उस दिन रोहन और शाम लडकि देखने के लिए अपने रिश्तेदार के यहा चलदिये। लडकि बडी हि खुबसुरत थी। लडकि पढिलीखी तथा संस्कारी भी थी। रोहन तो बडा खूष हूआ। ना कहने का तो कोई सवाल ही नहि था। शाम ने भी रोहन को उसके बारे मे ठिक सलाह देकर दोनो घर वापस आ गए। घर आकर सबके साथ बात करने के बात रोहन के घरवालो ने लडकि के यहा संदेश भेजा कि उनको लडकी पसंद है। रोहन के तो खुषी का ठिकाणा नहि था। अब तो बस लडकी के यहा से हाँ बाकि थी, लेकिन सब जानते थे कि ना का कोई सवाल पैदा ही नहि होगा। रोहन का चरित्र, उसकी नौकरी पढाई, रोहन के घरवाले सब कुछ अच्छा था।
4 दिन बात लडकि वालोँ ने संदेश भेजा। संदेश तो बडा हि हैरान करने वाला था। लडकिने रोहन को नापसंद कर दिया था। घरवालो के साथ साथ रोहन भी हैरत मे था कि क्या वजह होगी कि जिसके चलते मुझे ठुकराया गया। रोहन तो दिखने मे भी अच्छा था तो फिर क्या वजह थी। फिर बहुत सोच विचार करके सबने तय किया कि लडकिवालोँ से पुछा जाए कि इसकि क्या वजह है? तो फिर रोहन के पिताजी खुद एक दिन लडकि को मिलने के लिए उनके घर गये। बातो बातो मे एक चोँका देनेवाली बात पता चली। लडकि को रोहन पसंद था लेकिन एक चीज उस लडकि को पसंद नहि थी और वो थी रोहन कि रखी हुई दाढि। वैसे तो रोहन कि शेव अच्छे से शेप मे थी और रोहन उसका अच्छि तरिके से खयाल भी रखता था लेकिन सबकि पसंद थोडे हि एक जैसी होती है। उस लडकि को शेव बिलकुल भी पसंद नहि थी और इसी कारण उसने रोहन को नाकारा था।
उस दिन से रोहन ने तय किया कि अब वो हर रोज शेविंग करेगा। रोहन तो बात को समज गया, और अब तो मैने भी रोजाना शेविंग करना चालु किया है। पता नहि मेरे हात से एसा मौका कब निकल जाए।
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