Monday, 8 September 2014

Ebola - A deadly virus इबोला वायरस

इबोल वायरस एक ऐसा वायरस है, जिससे इबोला वायरस बीमारी (ईवीडी) या इबोला रक्तस्त्राव बुखार (ईएचएफ) होता है। सबसे पहले ये वायरस 1976 में सुडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाया गया था।

यह वर्तमान में एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरु हो जाता है, जिससे अंदरूनी ब्लीडिंग प्रारंभ हो जाती है। यह एक अत्यंत घातक रोग है।इसमें ९०% रोगियों की मृत्यु हो जाती है। पश्चिम अफ्रीकी देश इबोला के अब तक के सबसे बुरे प्रकोप से दौर गुजर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि इबोला वायरस कहीं पूरी दुनिया को ही चपेट में न ले ले। इबोला वायरस के खतरे से अमेरिका भी परेशान हो उठा है। अमेरिकी शांति सेना ने तीन देशों से अपने सैकड़ों स्वयंसेवकों को बाहर निकाल लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि दो स्वयंसेवकों को अलग रखा जा रहा है क्योंकि वह विषाणु की चपेट में आकर मारे गए एक व्यक्ति के संपर्क में थे।

शुरुआत


इस रोग की पहचान सर्वप्रथम सन १९७६ में इबोला नदी के पास स्थित एक गाँव में की गई थी। इसी कारण इसका नाम इबोला पडा

रोग फैलने के कारण

यह रोग पसीने और लार से फैलता है। संक्रमित खून और मल के सीधे संपर्क में आने से भी यह फैलता है।इसके अतिरिक्त, यौन संबंध और इबोला से संक्रमित शव को ठीक तरह से व्यवस्थित न करने से भी यह रोग हो सकता है। यह संक्रामक रोग है।ये वायरस संक्रमित जानवर विशेष तौर में बंदर, चमगादड़ या उड़ने वाली लोमड़ी और सुअरों के खुन या शरीर के तरल पदार्थ से फैलता है। अब तक इस बीमारी का कोई विशेष उपचार नहीं है। फिर भी इससे ग्रस्त लोगों की मदद के लिए उन्हें ओरल रिहाईड्रेशन थैरेपी, जिसमें रोगी को मीठा और नमकीन पानी पीने के लिए दिया जाता है या नसों में तरल पदार्थ दे सकते हैं। इस रोग में मृत्यु दर काफी ऊंची है।

लक्षण

इसके लक्षण हैं- उल्टी-दस्त, बुखार, सिरदर्द, ब्लीडिंग, आँखें लाल होना और गले में कफ़। अक्सर इसके लक्षण प्रकट होने में तीन सप्ताह तक का समय लग जाता है।

रोग में शरीर को क्षति

इस रोग में रोगी की त्वचा गलने लगती है। यहाँ तक कि हाथ-पैर से लेकर पूरा शरीर गल जाता है। ऐसे रोगी से दूर रह कर ही इस रोग से बचा जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ ने जारी की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पश्चिमी अफ्रीका के इबोला विषाणु प्रभावित राष्ट्रों को चेतावनी दी कि यह महामारी काबू से बाहर हो रही है और अन्य देशों में फैल सकती है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है और गंभीर आर्थिक समस्या आ सकती है।
डब्ल्यूएचओ की प्रमुख मार्गरेट चान ने गिनी, सियरा लियोन और लाइबेरिया के नेताओं के एक क्षेत्रीय सम्मेलन में बताया कि इस महामारी के खिलाफ प्रतिक्रिया अपर्याप्त है जिससे यह खुलासा होता है कि यह महामारी हमारे काबू पाने की कोशिशों से कहीं तेजी से फैल रहा है। 

उपचार

अभी इस बीमारी का कोई ईलाज नहीं है। इसके लिए कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है। इसका कोई एंटी-वायरस भी नहीं है।



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